बहावी आंदोलन
1820 से 1870 के बीच हुआ हुआ
आंदोलन क्षेत्र - पंजाब और बंगाल
आंदोलन के संस्थापक - सैयद अहमद बरेलवी थे। जिन पर अब्दुल वहाब का प्रभाव था तथा संत शाह वली उल्ला का महत्वपूर्ण प्रभाव नजर आता है।
आंदोलन का उद्देश्य -
धार्मिक उद्देश्य - आंदोलन का उद्देश्य इस्लाम धर्म में सुधार करना था अर्थात इस्लाम धर्म की बुराइयों को समाप्त कर मूल रूप में इस्लाम की स्थापना करना चाहते थे।
राजनीतिक उद्देश्य - भारत दारुल हर्ब( काफिरों का देश ) है इसे इस्लाम हब ( इस्लाम देश ) में बदलना है।
बंगाल तथा पंजाब से क्रमशः सिक्ख और अंग्रेजों का शासन निकाल फेंक मुसलमानों का शासन स्थापित करना चाहते थे।
सैयद अहमद बरेलवी 1820 के बाद रुहेलखंड क्षेत्र में अपने विचारधारा का प्रचार प्रसार करने लगे।
पटना में केंद्र स्थापित किया तथा कार्यकारी कार्यालय सीथना ( वर्तमान खैबर पख्तून ) बनाया गया जिसका संचालन पटना से होगा।
1830 में पेशावर पर कब्जा कर लिया गया इस समय पेशावर के शासक राजा रणजीत सिंह थे।
1831 में सैयद अहमद बरेलवी का सामना रणजीत सिंह की सीना से बालाकोट में हुआ जिसे बालाकोट युद्ध के नाम से जाना जाता है इस युद्ध में 1831 सैयद अहमद बरेलवी की मृत्यु हो गई।
बंगाल क्षेत्र में
बंगाल में आंदोलन का नेतृत्व टीतू मीर ने संभाला जो सैयद अहमद बरेली से प्रभावित थे किसानों को एकत्र कर जमीदारों व अंग्रेजो के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा।
1831 में टीतू मीर मृत्यु हो गई।
नेतृत्व पटना से प्रारंभ हुआ जिसका नेतृत्व विलायत अली ने किया विलायत अली की मृत्यु 1852 में हुई जिसके बाद इनायत अली ने नेतृत्व संभाला।
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महत्वपूर्ण प्रश्न :-
1.उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान होने वाले "बहावी आंदोलन" का मुख्य केंद्र था-
(a) लाहौर
(b) पटना
(c) अमृतसर
(d) पुणे
उत्तर-(b)
अंग्रेजी प्रभुसत्ता को सबसे सुनियोजित तथा गंभीर चुनौती वहाबी आंदोलन से मिली, जो 19वीं शताब्दी के
तीसरे दशक से सातवें दशक तक चलता रहा। रायबरेली के सैयद अहमद बरेलवी भारत में इस आंदोलन
के प्रवर्तक थे। वह अरब के अब्दुल वहाब से प्रभावित हुए, परंतु अधिक प्रभाव दिल्ली के एक संत शाह
वलीउल्लाह का था। सैयद अहमद बरेलवी की महत्वाकांक्षा पंजाब में सिक्खों और बंगाल में अंग्रेजों को
अपदस्थ करके भारत में मुस्लिम सत्ता को पुनर्स्थापित करना था।
सैयद अहमद बरेलवी के प्रयत्नों से इस आंदोलन की विचारधारा शीघ्र ही काबुल, उत्तर-पश्चिमी सीमा
प्रांत, बंगाल, बिहार, मध्य प्रांत आदि में फैल गई। कुछ समय के लिए इन्हों ने 1830 ई. में पेशावर पर
कब्जा कर लिया और अपने नाम के सिक्के ढलवाए, किंतु अगले ही वर्ष वह बालाकोट की लड़ाई में मारे
गए। सैयद अहमद बरेलवी की मृत्यु के बाद पटना इस आंदोलन का केंद्र बना। इस अवधि में आंदोलन का
नेतृत्व मौलवी कासिम, विलायत अली, इनायत अली, अहमदुल्ला आदि ने किया। पटना के अतिरिक्त
हैदराबाद, मद्रास, बंगाल, यूपी. तथा बंबई में भी इस आंदोलन की शाखाएं स्थापित की गई। 1857 के
विद्रोह में वहाबियों ने अंग्रेज विरोधी भावनाओ ंके प्रसार में बहुत योगदान दिया था।
2.वहाबी आंदोलन को किसने संगठित किया?
(a) अब्दुल वहाब
(b) शाह वलीउल्लाह
(c) सैयद अहमद बरेलवी
(d) बिरसा मुंडा
उत्तर (c) सैयद अहमद बरेलवी
3. सैयद अहमद बरेलवी की मृत्यु हु
ई-
(a) वर्ष 1831 में
(b) वर्ष 1826 में
(c) वर्ष 1852 में
(d) वर्ष 1857 में
उत्तर-(A)
वर्ष 1831 में।
4. वहाबी आंदोलन से संबंधित निम्निलखित कथनों पर विचार कर सत्य कथन का चयन कीजिए-
1. वहाबी आंदोलन का धार्मिक उद्देश्य मूल इस्लाम की स्थापना था।
2. वहाबी आंदोलन का राजनीतिक उद्देश्य पंजाब से अंग्रेजों का शासन समाप्त कर मुसलमानों का शासन स्थापित करना था।
3. वहाबी आंदोलन ने पृथकतावादी विचार को बढ़ावा दिया।
उपर्युक्त कथनों के आधार पर उत्तर चुनिए ?
(a) 1,2 तथा 3
(b) 2 तथा 3
(c) 1 तथा 2
(d) 1 तथा 3
उत्तर-(D)
वहाबी आंदोलन का धार्मिक उद्देश्य मूल इस्लाम की स्थापना था। वहाबी आंदोलन का राजनीतिक उद्देश्य
पंजाब से सिखों का शासन समाप्त कर मुसलमानों का शासन स्थापित करना था।वहाबी आंदोलन ने
पृथकतावादी विचार को बढ़ावा दिया।
5. “तीतूमीर का आंदोलन” से संबंधित निम्निलखित कथनों पर विचार कर सत्य कथन का चयन कीजिए-
1. तीतूमीर पर सैयद अहमद बरेलवी का प्रभाव था।
2. तीतूमीर का राजनीतिक उद्देश्य बंगाल से अंग्रेजों का शासन समाप्त कर मुसलमानों का शासन स्थापित करना था।
3. तीतूमीर के आंदोलन ने कृषकों को जागरूक किया।
उपर्युक्त कथनों के आधार पर उत्तर चुनिए ?
(a) 1,2 तथा 3
(b) 2 तथा 3
(c) 1 तथा 2
(d) 1 तथा 3
उत्तर-(A)
तीतूमीर पर सैयद अहमद बरेलवी का प्रभाव था।तीतूमीर का राजनीतिक उद्देश्य बंगाल से अंग्रेजों का
शासन समाप्त कर मुसलमानों का शासन स्थापित करना था।तीतूमीर के आंदोलन ने कृषकों को
जागरूक किया।
6. तीतूमीर के आंदोलन का क्षेत्र था-
(a) पंजाब
(b) दक्षिण भारत
(c) बंगाल
(d) महाराष्ट्र
उत्तर-(C)
बंगाल ।
7. तीतूमीर की मृत्यु हु
ई-
(a) वर्ष 1831 में
(b) वर्ष 1826 में
(c) वर्ष 1852 में
(d) वर्ष 1857 में
उत्तर-(A)
वर्ष 1831 में।
By:- lbsnaa jeet
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